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कौन है धनंजय सिंह,पढ़िए पुरी गाथा

जल निगम के अधिकारी को धमकी देने के मामले में 14 दिन न्यायिक हिरासत में जेल भेजे गए पूर्व बाहुबली सांसद धनंजय सिंह की कहानी किसी हिंदी फिल्म से कम नहीं है। जौनपुर के टीडी कॉलेज से छात्र राजनीति में कदम रखने वाले धनंजय सिंह ने जल्द ही लखनऊ यूनिवर्सिटी में छात्र राजनीति शुरू कर दी थी। उस दौर में वो मजबूत छात्र नेता अभय सिंह के काफी करीबी थे। हालांकि छात्र राजनीति के साथ अपराध में सक्रिय रहने के उस दौर में धनंजय सिंह के खिलाफ 1998 तक हत्या, लूट और हत्या के प्रयास जैसी गंभीर धाराओं में कई एफआईआर दर्ज हो चुकी थी और धनंजय पर 50 हज़ार का ईनाम भी था।
छात्र राजनीति के दौरान ही सक्रिय राजनीति में प्रवेश करने का मन धनंजय सिंह बना चुका था। 2002 के विधानसभा चुनाव के दौरान कभी मुन्ना बजरंगी के गुरु कहे जाने वाले और जौनपुर के नामी बदमाश विनोद नाटे जौनपुर की रारी विधानसभा से चुनाव लड़ने की तैयारी कर रहा था। लेकिन चुनाव से ठीक पहले एक्सीडेंट में विनोद की मौत हो गई। फिर विनोद नाटे के समर्थकों से जुड़कर धनंजय सिंह ने जौनपुर की रारी विधानसभा से निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में चुनाव लड़ा और जीत गया। इसके बाद 2007 में जनता दल यूनाइटेड के टिकट से विधायक बना। 2008 में बसपा से जुड़ा और 2009 में बसपा के टिकट पर जौनपुर से सांसद बना धनंजय सिंह। लेकिन 2011 में मायावती ने पार्टी विरोधी गतिविधियों के चलते धनंजय सिंह को पार्टी से निकाल दिया। इसके बाद धनंजय ने 2014, 2017 के चुनावों में भी हाथ आजमाया लेकिन सफलता नहीं मिली।
हालांकि इस बीच धनंजय सिंह के व्यक्तिगत जीवन में भी उथल-पुथल जारी रही धनंजय सिंह की पहली पत्नी की मौत शादी के 9 महीने बाद ही संदिग्ध हालातों में हुई थी। इसके बाद धनंजय ने डॉक्टर जागृति सिंह से दूसरी शादी की, लेकिन 2013 में नई दिल्ली में डॉक्टर जागृति सिंह पर घरेलू नौकर की हत्या का आरोप लगा और धनंजय सिंह पर सबूत मिटाने का आरोप लगा। धनंजय सिंह ने 2017 में तीसरी शादी दक्षिण भारत के बड़े कारोबारी परिवार की लड़की से पेरिस में की। इस शादी से धनंजय एक बार फिर चर्चा में आ गया था।

2018 में पूर्वांचल के माफिया मुन्ना बजरंगी की बागपत जेल में हत्या हुई तो पत्नी सीमा सिंह इस हत्या की साजिश रचने का आरोप धनंजय सिंह पर लगाया। जिसकी जांच अब सीबीआई कर रही है। 2018 में धनंजय सिंह को मिली वाई श्रेणी की सुरक्षा यूपी सरकार ने हटा ली। जिसपर धनंजय ने ईलाहाबाद हाई कोर्ट में याचिका दाखिल की और अपनी जान को खतरा बताते हुए सुरक्षा की मांग की। हाईकोर्ट में दाखिल याचिका में धनंजय सिंह ने इंटेलिजेंस को लिखे एसटीएफ के एक पत्र को भी लगाया था, जिसमें उनकी जान को खतरे का जिक्र था। लेकिन यही पत्र धनंजय को उल्टा पड़ गया। हाईकोर्ट ने पूछा कि अतिगोपनीय पत्र धनंजय के पास कैसे पहुंचा? धनंजय की ओर से तर्क दिया गया कि किसी पत्रकार के माध्यम से यह पत्र उनके हाथ लगा है। हाईकोर्ट के आदेश पर इस अति गोपनीय पत्र लीक की एसआईटी जांच भी हुई। एसआईटी ने मामले की जांच पूरी कर हाई कोर्ट को दी और हाईकोर्ट ने शासन को भेज दी। हालांकि एसआईटी की जांच में क्या निकला और किसी पर अति गोपनीय पत्र लीक मामले में कार्रवाई होगी या नहीं इसका खुलासा अब तक नहीं हो पाया है।