दिल्ली में महिलाओं को मिला सस्ते सफर का तोहफा, इस योजना से कितना लाभ कितना नुकसान?

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विधानसभा चुनाव से ठीक पहले केजरीवाल महिला वोटरों को साधने के लिए एक बड़ा मास्टरस्ट्रोक चला है। इस एलान के तहत दिल्ली महिलाओं को अब दिल्ली मेट्रो और डीटीसी बसों और क्लस्टर बसों में यात्रा मुफ्त करने की सुविधा मिलेगी। इस योजना का एलान खुद दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने किया है, केजरीवाल ने कहा है कि हम किसी के ऊपर सब्सिडी थोपेंगे नहीं,

जो महिलाएं अपना पैसा दे सकती हैं वह अपना किराया दे सकती है।  इस योजना को अगले दो-तीन महीने में लागू कर दिया जाएगा। साथ ही मुख्यमंत्री ने कहा कि हम एक ईमेल जारी कर रहे हैं जिस पर जनता अपना सुझाव दे सकती है कि इस योजना को कैसे लागू किया जाए।  एनसीआर की महिलाओं को इस योजना का फायदा मिले या नहीं इस पर भी सुझाव मांगे गए हैं।

जब सीएम केजरीवाल इस योजना का एलान कर रहे थे तब उनसे पूछा गया कि  आप बिना केंद्र की सहमति के कैसे इस योजना को लागू करेंगे तो वह बोले कि हम इस पर सब्सिडी दे रहे हैं, इसके लिए अनुमति की जरूरत नहीं है। केजरीवाल का कहना है कि हमने ये फैसला महिलाओं की सुरक्षा और बढ़ते मेट्रो के किराए को देखते हुए लिया है।

इतना ही नहीं अरविंद केजरीवाल ने दिल्ली में 70,000 सीसीटीवी कैमरे लगाने की भी घोषणा की है। 8 जून से दिल्ली में सीसीटीवी लगाने का काम शुरू हो जाएगा और दिसंबर तक सीसीटीवी कैमरे लगाने का काम पूरा कर लिया जाएगा।  इसका मतलब है कि आने वाले समय में पूरी दिल्ली में ढाई लाख कैमरे लग जाएंगे।  इसके तहत सभी सरकारी स्कूलों में कैमरे लगाने का काम शुरू हो चुका है जिसमें कुल 1.5 लाख कैमरे लगाए जाएंगे।  केजरीवाल का कहना है कि ‘अगर सरकार फ्री में कुछ दे रही है तो अच्छा ही है न कोई चोरी तो नहीं है’। वैसे देखा जाए तो दिल्ली में महिलाओं की सुरक्षा को देखते हुए 2 बड़े फैसले लिए गए हैं। एक तो सीसीटीवी कैमरे लगाने के लिए ढाई साल से कोशिश की जा रही थी जिसके लिए डेढ़ लाख सीसीटीवी लगने का टेंडर भी दिया गया था, 70 हजार सीसीटीवी का सर्वे हो चुके है लेकिन ये योजना अभी तक जमीनी स्तर पर नहीं उतर पाई थी।

बाद करें दूसरी योजना की तो बसों और मेट्रो में कुल यात्रियों में 33 फीसदी महिलाएं होती हैं इसके मुताबिक मेट्रो में महिलाओं की मुफ्त यात्रा पर करीब एक हजार करोड़ प्रतिवर्ष का खर्च आएगा जबकि बसों के लिए करीब 200 करोड़ रुपये के खर्च का आंकलन लगाया गया है। कुल मिला कर देखा जाए तो सरकार पर प्रतिवर्ष करीब 1200 करोड़ रुपये का बोझ पड़ेगा।

इन सबके बीच ये सवाल उठ रहे हैं कि ये 1200 करोड़ का खर्च सरकार कैसे वहन करेगी और जैसा कि अरविंद्र केजरीवाल ने बयान दिया है कि इसके लिए उन्हें केंद्र से अनुमति की जरूरत नहीं है तो क्या बिना सरकार की मदद के इसको कर पाना संभव होगा। तो वहीं दूसरी तरफ ये भी सवाल उठ रहा है कि इस योजना के लागू होने से दिल्ली की उन महिलाओं को लाभ देने की कोशिश करना नाकाम है जो कि आर्थिक रूप से सशक्त हैं। और वैसे देखा जाए तो मुफ्त की चीजों की कदर करना बहुत मुश्किल होता है उदाहरण के तौर पर पानी की बेतरतीब बरबादी को देख सकते हैं।

अब ये देखना दिलचस्प होगा कि केजरीवाल सरकार का ये प्लान मास्टरस्ट्रोक साबित होता है या आप सरकार के लिए स्ट्रोक का काम करता है। क्योंकि हाल ही में हुए लोकसभा चुनाव के बाद से आम आदमी पार्टी को रिवाइवल की जरूरत है इसमें 9 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में 40 से ज्यादा सीटों पर चुनाव लड़ा था, लेकिन उसे महज एक सीट पर ही जीत मिली है। इस चुनाव में झटका लगने के बाद पार्टी ने अगले साल होने वाले दिल्ली विधानसभा चुनाव की तैयारी जोर शोर से जुट गई है और इन योजनाओं का एलान उसी तैयारी के अंतर्गत किया जा रहा है।

 

 

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