Mon. Sep 28th, 2020

Expose India

Truth within

क्या इंसानी मल से भी कोरोना के लक्षण देखने को मिल सकते हैं?

देश – विदेश के बड़े- बड़े शोधकर्ता कोरोना वायरस के फैलने का यहीं कारण बता रहे थे कि यह वायरस संक्रमित व्यक्ति के संपर्क में आने से फैलता हैं, हाथ मिलाने, हाथ न धोने, खांसने व छीकने से फैलता हैं। लेकिन चीन की एक यूनिवर्सिटी ने यह शोध किया हैं कि कोरोना संक्रमित इंसानी मल से दूसरे इंसानों को भी फैल सकता हैं। इसी कारणवश चीन के शोधकर्ता चाहते हैं कि दुनिया भर में कोरोना संदिग्धों के मल की जांच हो। जिससे कोरोना की पुष्टि पुख्ता हो सके।

चीन की हॉन्गकॉग यूनिवर्सिटी ने किया खुलासा

चीन की हॉन्गकॉग यूनिवर्सिटी के मेडिकल विभाग के शोधकर्ताओं ने हाल ही में 14 मरीजों के शरीर से कोरोना वायरस कोविड- 19 के 339 सैंपल लिए , इस सैंपल में इनके नाक के स्वैब, मल- मूत्र, खून शामिल था। लेकिन उस जांच में सबसे बड़ा खुलासा यह हुआ कि 3 मरीजों खून, नाक के स्वैब से कोरोना के लक्षण नहीं मिले हैं। बल्कि 14 मरीजों के  मल से कोरोना के लक्षण स्पष्ट रुप से मिले हैं। यह सभी इंसानी मल से संक्रमित थे।

प्रोफेसर ‘पॉल चैन के श्योंग’ ने बताया कोरोना जांच से संबधित कुछ बातें

प्रोफेसर पॉल चैन के श्योग ने बताया कि थूक से कोरोना संक्रमण की जांच करना कारगर हैं। लेकिन आजकल इंसानी शरीर वायरस का घर बन चुका हैं। इसलिए बाकी का भी टेस्ट किए जाने जरुरी हैं जिससे बीमारी की पुष्टि हो।  उन्होने बताया कि हॉन्ग्कॉग में लोग यह नहीं जानते कि गले के अंदर जमा थूक को जोर से कैसै थूके कि वह सही तरीके से बाहर आए। इसलिए ये भी हो सकता हैं कि हॉन्ग्कॉग में मौजूद लोगों ने सही से कोरोना की जांच न कराई हो। प्रो0 श्योंग ने बताया कि हमने जिन मरीजों की जांच की, उनके 1 मिलीलीटर थूक में 32 लाख वायरस हैं। जबकि इंसानी मल में 12,000 वायरस प्रति मिलीलीटर था। यानि इंसानी मल में भी कोरोना ने कब्जा जमा लिया हैं। इसके बाद प्रो0 श्योंग ने बताया कि अब पूरी दुनिया को चाहिए कि वह कोरोना के संदिग्धों के मल की भी जांच करें। इससे ज्यादा बेहतर परिणाम सामने आंएगे, इससे चिकित्साकर्मियों को कोरोना मरीजों में संक्रमण की पुष्टि होगी।